Shiv Stuti lyrics PDF शिव स्तुति – Hindi & English

Shiv Stuti lyrics PDF शिव स्तुति – Hindi & English. शिव, हिन्दू धर्म के त्रिमूर्ति में से एक देवता हैं। वे नगराधिष्वर (कई नगरों के स्वामी), महाकाल (मृत्यु के स्वामी) और भोलेनाथ (सरलता के स्वामी) के रूप में जाने जाते हैं। शिव को त्रिशूल, गंगा जल, सर्प (नाग) और चंद्रमा से सजाया जाता है। Shiv Stuti lyrics Hindi और English में नीचे दिया गया है।

shiv stuti lyrics
Shiv Stuti lyrics

Shiv Stuti lyrics in Hindi

शिव स्तुति

धन्य धन्य भोलानाथ बाँट दिए तीनो लोक पल भर में।
ऐसो दीन दयाल मेरे शम्भू भरो खजाना पलभर में ।।

प्रथम वेद तो ब्रह्मा को दे दिया बने वेद के अधिकारी ।
विष्णु को दिया चक्र सुदर्शन लक्ष्मी सी सुन्दर नारी ।।

इन्द्र को दिया कामधेनु और ऐरावत सा बलकारी ।
कुबेर को कर दिया आपने सारी सम्पत्ति का अधिकारी ।।

अपने पास पात्र नहीं रखा, मग्न रहे बाघाम्बर में ।
ऐसे दीनदयाल मेरे शम्भू भरो खजाना पल भर में ।।

अमृत तो देवताओं को दे दिया, आप हलाहल पान किया ।
ब्रह्म ज्ञान दे दिया उसी को, जिसने शिव तेरा ध्यान किया ।।

भागीरथ को दे दी गंगा, सब जग ने स्नान किया।
बड़े-बड़े पापियों को तारा, पलभर में कल्याण किया ।।

आप नशे में मस्त रहो, पियो भंग नित खप्पर में।
ऐसे दीन दयाल मेरे शम्भु, भरो खजाना पल भर में ।।

लंका तो रावण को दी, बीस भुजा दस शीश दिए ।
रामचन्द्र को धनुष बाण और हनुमत को जगदीश दिये।।

मनमोहन को दे दी मोहनी, और मुकुट बख्शीश दिए ।
मुक्त हुए काशी के वासी, भक्ति में जगदीश दिए ।।

वीणा तो नारद को दे दी, हरि भजन को राग दिया।
ब्राह्मण को कर्मकाण्ड और सन्यासी को त्याग दिया ।।

जिस पर तुमरी कृपा भई, उसी को अनगन राग दिया।
जिसने ध्याया उसी ने पाया महादेव तेरे वर में ।।

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Shiv Stuti lyrics in English

Shiv Stuti

Dhanya dhanya Bholanath, baant diye teeno lok pal bhar mein.
Aiso deen dayal mere Shambhu, bharo khajana pal bhar mein.

Pratham ved to Brahma ko de diya, bane ved ke adhikari.
Vishnu ko diya chakra Sudarshan, Lakshmi si sundar nari.

Indra ko diya Kamdhenu aur Airavat sa balaakari.
Kuber ko kar diya aapne saari sampatti ka adhikari.

Apne paas patra nahin rakha, magn rahe Baghambhar mein.
Aise deendayal mere Shambhu, bharo khajana pal bhar mein.

Amrit to devtaon ko de diya, aap halaahal paan kiya.
Brahmgyan de diya usi ko, jisne Shiv tera dhyaan kiya.

Bhagirath ko de di Ganga, sab jag ne snan kiya.
Bade-bade paapiyon ko taara, pal bhar mein kalyan kiya.

Aap nashe mein mast raho, piyo bhang nit khappar mein.
Aise deendayal mere Shambhu, bharo khajana pal bhar mein.

Lanka to Ravan ko di, bees bhujaa das shish diye.
Ramchandra ko dhanush baan aur Hanumat ko Jagdish diye.

Manmohan ko de di Mohini, aur mukut bakshish diye.
Mukt hue Kashi ke vaasi, bhakti mein Jagdish diye.

Veena to Narad ko de di, Hari bhajan ko raag diya.
Brahman ko karmakand aur sanyasi ko tyag diya.

Jis par tumhari kripa bhai, usi ko anagan raag diya.
Jisne dhyaya usi ne paya Mahadev tere var mein.

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अन्य लोकप्रिय स्तुति

भगवान शिव को समर्पित एक अन्य लोकप्रिय स्तुति (Shiv Stuti lyrics) नीचे दी गई है:

ॐ नमः शिवाय, शिवाय नमः।
महेश्वराय नमः, शंकराय नमः॥

नीलकण्ठाय नमः, गिरिजापतये नमः।
गङ्गाधराय नमः, विष्णुवल्लभाय नमः॥

नन्दीश्वराय नमः, भोलेनाथाय नमः।
अशुतोषाय नमः, महादेवाय नमः॥

अर्धनारीश्वराय नमः, नटराजाय नमः।
पशुपतये नमः, अमरेश्वराय नमः॥

जटाधराय नमः, भस्माङ्गरागाय नमः।
शूलपाणये नमः, नागेश्वराय नमः॥

त्रिपुरान्तकाय नमः, गौरीपतये नमः।
भूतनाथाय नमः, अश्वारूढ़ाय नमः॥

कैलासाधिपाय नमः, चण्डेश्वराय नमः।
अर्धचन्द्राय नमः, मृत्युञ्जयाय नमः॥

हर हर महादेव, नमः शिवाय।
भोले बाबा की जय, जय शिवराय॥

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Shiv कौन है ?

शिव पूर्णतः आत्मनिर्भर, आद्यांतरहित और निराकार हैं। वे आदि और अनंत हैं, और ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवताओं के परम पिता हैं। शिव को साधारण रूप से ध्यान में लिया जाता है ताकि वे समस्त सत्ताओं के द्वारा सार्वभौमिकता के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकें।

शिव की पूजा और आराधना का महत्वपूर्ण स्थान हिन्दू धर्म में है। उन्हें भक्ति, समर्पण और ध्यान का प्रतीक माना जाता है। शिव को भक्तिभाव से पूजने से मान्यता है कि वे अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग दिखाते हैं।

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Shiv Stuti lyrics क्या है?

शिव के लिए अनेक मंत्र, स्तोत्र और स्तुतियाँ उपलब्ध हैं, जो उनकी महिमा और गुणों की प्रशंसा करती हैं। शिवतत्त्व की अध्यात्मिक अनुभूति और शिव के ध्यान में लीन होने से व्यक्ति में मानसिक शांति, आत्मशक्ति और संतोष की प्राप्ति होती है।

शिव स्तुति का अभिप्रेत विषय है, यह एक प्रकार की प्रार्थना या शिव की महिमा का गान है। शिव स्तुति के माध्यम से भक्त उनके गुणों, शक्तियों और लीलाओं की प्रशंसा करते हैं। यह उनकी प्रसन्नता और कृपा को प्राप्त करने का एक मार्ग है।

शिव स्तुति के अनेक रूप, जैसे मंत्र, स्तोत्र, आरती, चालीसा, अष्टकम आदि हैं जो उनके भक्तों द्वारा भगवान शिव की पूजा और आराधना में प्रयोग होते हैं। ये स्तुतियाँ उनकी अद्वैत तत्त्व, अनंत कल्याणकारी गुणों, अनंत शक्तियों और परमात्मा के साथ उनके अभिन्नता की महिमा का वर्णन करती हैं।

इन स्तुतियों का उच्चारण, पाठ या गायन करने से शिव भक्त शिवतत्त्व के साथ अनुभूत होते हैं और उनके मन, शरीर और आत्मा को शिव के दिव्य आध्यात्मिक आवेश से प्रेरित करते हैं। ये स्तुतियाँ उनके भक्तों को शक्ति, शांति, सुख, समृद्धि, संपूर्णता और मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग प्रदान करती हैं।

शिव स्तुति का पाठ या गायन भक्ति और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण अंग है जो शिव के सानिध्य में भक्त को आत्मिक एवं मानसिक संतोष, शक्ति और शांति का अनुभव कराता है।

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